जल

जल प्रकृति का एक ऐसा अमृत है जिसके बिना संसार का हर प्राणी ऐक दिन से ज्यादा जीवित नहीं रह सकता ।

लेकिन सभी प्राणियों में सर्वोच्च मनुष्य है फिर भी मनुष्य जल की बचत और स्वच्छता को भूल जाता है ।

जल के स्रोत प्रकृति की धरोहर है और हमें इसका सदैव सम्मान करना चाहिए नित प्रति प्रणाम करते रहना चाहिए ।इसके अलावा जल के सभी भंडारण को साफ सुथरा रखने में सहयोग करना चाहिए और जल कि बचत करनी चाहिए ।

पं पुरूषोत्तम शर्मा