वृद्धाश्रम

वृद्धाश्रमउन वुजर्गो के लिए हैं जो वेसहारा हैं जिनकी संतान नहीं है ।

लेकिन हमने देखा कि अक्सर चार चार पुत्रों के होते हुए भी कई वुजर्ग आश्रम में जीवन व्यतीत करने को मजबूर है।

आखिर ऐसा क्यों इस समाज को कब शिक्षित होना है कौन जिम्मेदार है इसका धिक्कार है ऐसी संतान पर जो अपने माता पिता की सेवा नहीं कर सकती यह कैसे भूल सकता है मनुष्य की थोडे दिनों के बाद स्वयं उसे भी बूढा ही होना है

और मेरे पुत्र भी मुझे वृधाश्रम भेज देंगे। कैसी विडंबना है हर पति पत्नी अपनी संतान के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपना आधा जीवन संघर्ष करते हैं और जब वह एक कामयाब श्रेणी में पहुंच जाते हैं तो उनको वहीं माता पिता के लिए समय नहीं मिलता । मेरे मत अनुसार जो बेटा अपने माता पिता को आश्रम भेजता है तो उन वुजर्गो को अपनी सम्पूर्ण संपत्ति आश्रम को दान कर देनी चाहिए ।

पं पुरूषोत्तम शर्मा