दिव्यांग

दिव्यांग होना हमारे पूर्व जन्म के कर्मों का फल है यह कहना है शास्त्रों का लेकिन सत्य को कोई नहीं जान पाया फिर भी दिव्यांग व्यक्ति एक पीडादायक जीवन जीने को मजबूर है।

समाज अगर थोडा सा सहयोग दे दे तो हम लोग भी खुद को सम्पूर्ण और कार्य कुशल वना सकते हैं

मैं अभी तक एक हजार लोगों से मिल चुका हूं जो लोग जीवन भर अपने पैरों पर चल नहीं सकते इन को थोडी सी दिशा देने की जरूरत है और फिर यह लोग सम्पूर्ण व्यक्ति से आगे निकल सकते हैं

विदेशों में वहूत से यंत्र आ चुके हैं जिनसे निष्पैर व्यक्ति कोसों दूर दौड कर चला जाता है। हमारे देश में कब दिव्यांग जनों को सही दिशा मिलेगी इसी इंतजार मैं कइ दिव्यांग लोग परलोक सिधार चूके हैं

पं पुरूषोत्तम शर्मा